बाइक में
राजनांदगांव से अंम्बिकापुर
दोस्तो,
आज मै इस लाकडाउन के समय आप सभी से हमारे
प्रिय दोस्ते के साथ हमने 23 दिसंबर 2018
को बहुत ही शानदार यात्रा को आप सभी के बीच सेयर कर रहा हुं आशा है आप सभी को यहा
खुशनुमा पल आप लोगो ने भी आपने दोस्तो के साथ भी इस प्रकार की हर वो दिन को या
कहु रात को जीते होगे, ये हमारी और हमारे मित्रो के बहुत ही सुंदर सा एक
अदृश्य यात्रा थी जिसे हम सब ने बहुत मजे लिए। हम सबने बहुत दिनो से प्लनिंग मे
लगें हुये थे कि मैनपाट जाना है उसे छ.ग. की शिमला कहा जाता है तो क्यों न देखने
जाया जाए वहां पर हमारे बहुत से मित्रगण
रहते है पर दो खास मित्र है जो मेरे साथ राजनांदगांव मे पैथोलाजी पैरामेडीकल का
कोर्स करने आये लोभन और संजय तब से ये हमारे दोस्त बन गये ये दोनो साथ मेरं साथ रहे, कई बार इन लोगो ने घूमने चलने के लिए कहा पर कालेज की पढाई के वजह से कभी भी
राजनांदगांव से टूर पर नही गये तो हमारे कालेज के
दोस्त अवदेश, पियूष और एक प्रिय मित्र नागेश जो कि साथ मे काम
करते है सीसी टीवी टेक्निशयन है और भी दोस्तो से पूछा गया पर बाइक से जाने मे
हिम्मत नही जुटा पाये इसलिए हम चारो ने
निकलने की पुरी तैयारी कर ली जैसे कि गमै
कपडें, जैकेट, चश्मे, हेलमेट, बाइक की सर्विसिंग इत्यादि। अवदेश को
अच्छे समाझाना पडता है कि भाई घर वालो को बता देना और उनके घर वाले उसके जाने से
राजी हो जाते है, जाने से पहले अवदेश बडी बडी बाते कहने लगता है कि
ठीक है पुरा बाइक के पिछे गरम कपडे बाध कर लाउगा, फिर वो भी घर चला जाता है, पियुष भी अपने घर वालो केा मंतर दे कर परमिशन ले लेता कि हम लोग ट्रेन से जा
रहे है करके, इधर नागेश भाई भोढिया से रात मे ही मेरे रूम मे आ
जाते है, उसी समय मै अपने मम्मो से बात करते हुये बताता हू
उनको तो वो कहती है क्यो जा रहे हो वहां तो बहुत ठंण्डा रहती है अभी ठंडा मे क्या
करेगे उनके ऐसा बोलने पर मेने कहा कि वहां हम लोग ठंडा चेक करने जा रहे है तो वो
कहती है कि ''ठंडा ला तूमन चेक करहू कि ठंडा तूमही मन ला चेक कर
दिही'' इतना ही सुनते नागेश का हवा होने लग गया
क्योकि उसे ठंड से बहुत ही डर लगता है बोलता है दादा वहां कितना ठंड होगा, वो रात मे रूम मे भी मुह, नाक, कान को अपने गमछे से बाधे ही सेाता है, सुबह उठने पर वो बिना नहाय ही चलो मै तेयार हूं बोलता है ।

















































