Friday, December 28, 2018

शिवरीनरायण से हमारी टूर प्रांरम्‍भ

gekjh Vwj tks lhrkiqj vafcdkiqj gekjk Yk{;
महानदी

                                 
शिवरीनरायण
जाते हुये हमे रास्‍ते मे फुल मजा करते हुये आराम से रूकते रूकाते हुए निकलते है  हम
सबने शिवनाथ नदी पार कर शिवरीनरायण 12 बजे पहुचें वहां पर हम लोग राम मंदिर मे भगवान राम जी के दर्शन के लिए गये पर उस समय राम जी भोजन कर र‍हे थे जिससे उन‍की दर्शन नही हो पाया, वहां की मंदीरे बहुत प्रचीन थी लाल रंग के ईटे से रंगे हुये थे और हमारे पास समय भी बहुत कम था इसलिए हम लोग वहां पर निकल गये कुछ देर बैठकर अब समय भी बहुत हो गया था लगभग 1 बजे चुके थे हम लोग रास्‍ता पूछते हुये निकल पडे जब हम लोग यहां से निकले इस रोड मे तो खाने का कोई होटल न मिल पाने के कारण हम लोग बाइक चलाते गये तो अब क्‍या भूख के मारे सबका हालत खराब हो चूका था तो उस टाइम अचनाक याद आया कि अवदेश के मम्‍मी ने रोटी पैक की है फिर क्‍या एक रोड मे बोरिग था वहां पर रूके जगह पर बहुत छांव व शांति थी फिर सबके सब वहां खाने के लिए टुट पडे अंटी जी ने बहुत ही
अच्‍छा टमाटर की चटनी व पुडी बनाई थी जिसे सब खाये तो ऐसा लगा कि सही मे ये आज तो सब भूख के मारे पता नही आ जा पाते कि नही, हम लोग एंजाय के रूप मे अवदेश भाई को बहुत छिलटई करते हुये  अब वो जगह छोडकर आगे कि ओर निकल चले उधर रास्‍ता बहूत ही खराब है दोस्‍तो जिससे हम सब काफि दूरी तय करने के बाद हम लोग विशाल पहाड को देखे जिससे लग रहा था कि हम लोग रायगढ के सिंगनघड रामगढ की पहाडी पर पहुंच गये पर वह खरसिया था वहां पहुंचते ही बहुत सारा धूल व ट्रके कि लम्‍बी लाइने लगी हूई थी ए‍क आदमी से रास्‍ता पुछने पर उसने बाईपास रास्‍ता बताया पर वो पुरा ट्रके चलने के रास्‍ते भर धूल के गड्डे भर गये थे जिससे निेकल गये और शहर का नामो निशन नही था और हमारी मंजिले अब भी हमसे दूर थी अब यहां से जंगले प्रारंम्‍भ होने लगी, हम लोग बाइक बहूत ही तेज गति से चला रहे थे क्‍योकि 4 बज चुके थे, शाम होने का समय हो गया था उस रोड पर ट्रके भारी मात्रा मे चल रही थी अब उसके बाद हम लोग रूकते हुये रास्‍ता पुछते हुये छाल, हाटी,  धरमजयगढ वाले रोड पर निकल पडे धरमजयगढ वाले रोड ऐसा लग रहा था मानो हम सब प्रकृति के गोद मे आनंद महसूस कर रहे थे, हाटी के पास बडी बडी घटी मिली जो बहुत ही रोमांचक अनुभव था, आसपास से पेडों से वो ठंडी हवाये चलने लगी, महुएं की खुशबू और वो मनोरम दृश्‍य  जिसमे वहां की संस्‍कृति झलक रही थी वहां के जनजाति जंगलो वाले रास्‍ते से बाजार करके आने जाने वाले लोग दिखाई दे रहे थे, वो पुरानी जीप जिसमे जनजातियों के पुरा भरकर वापस घर ले जा रहे थे जिसे आज भी हम सब कभी भूल नही पायेगे। यहां से ऐसा प्रतित हो रहा था मानो अब शहरो के नामो निशान मिट गया हो पर मैने पेपरो मे दोस्‍तेा से काफि सुना था धरमजयगढ अच्‍छा फेमस शहर होगा पर ऐसा नही है, पर वहां के रहने वाले जनजतियो के लिए शहर से कम नही है इस रास्‍ते पर हमे पेट्रोल पंप मिला न ही एटीएम होगा भी तो एकत ही होगा अब यहां से निकलते हुऐ हमे अंधेला होने लग गया था हमारे दोस्‍त लोग हिम्‍मत खो बैठे थे पर क्‍या करते हौसला बढाने के गाडी रोककर एक दूसरे से बाते साते करके बस अब ज्‍यादा दूर नही हमारी मंजिल करके एक दूसरे को चार्च किये फिर निकल पडे रास्‍ते खराब तो थे ही अब हौसला ही था हमारे पास वहां से 30-35 किमी के बाद हम लोग को शहरो की तरह लाइटे जलती हुई दिखाई पडी वो शहर है पत्‍थलगांव था दोस्‍तो जहां पर रौनक ही रौनक वहां पर सभी प्रकार की दुकाने, सोरूम, पब्लिक सेवाएं आदि उपल्‍ब्‍ध है वो ही एक मात्र हमे शहरो की तरह दिखाई दिया जहां पर ट्रेफिक पुलिस भी तैनात थे अब ऐसा लग रहा था जैसे हम लोग सही जगह पर पहुचे है वहां से अपने दोस्‍त संजय को काल करके बता दिया उसने कहा चलो आ गये हो अब ज्‍यादा दूर नही है, पर रात करीब 7.30 हो चुका था बहां से सीतापुर के लिए रास्‍ता पुछते हुए हम लोग अंधेरे मे ही अपनी करीब मंजिल के पास पहॅुचने लगे
                           वहां पहुचते ही संजय भाई हम सब को लेने आ ही रहे थे मिलकर सबको बहुत अच्‍छा लगा, पूरी दुकाने सजी हुई थी क्रिसमस की तैयारी मे,  वहां से उसने अपने घर ले गया वहां उनके घर जाने पर हम लोग के आने की खूशी मे सब खाने की तैयारी मे लगे हुये थे अब हम सबको ए‍हसास होने लगा कि ठंड है यहां पर वहां तो सब सेवटर पहने हुऐ थे, फिर हम
ठंड का एहसास 
सबके लिए गर्म पानी लाया गया पिने के लिए जिसे देख कर ऐसा लगा क्‍या गर्म पानी पियेगे पर पिने के बाद पूरा शरीर गर्म हो गया वहां पर मौसम बहुत ही ठंड थी
,  जिससे सभी गर्म पानी से ही  हाथ धोकर फ्रेस होकर बैठे फिर भाभी जी आई सब से मेल मिलाप हुआ सब अपने अपने नाम बाताऐ।संजय भाई का बचपन मिशन से ही उनकी पढाई हुई है इसलिए वो भी अपने परिवार के दो भतिजीयों को भी अपने साथ घर पर रख कर पढा रहे थे उन दोनो से मिलकर अच्‍छा लगा अब ऐसा लग रहा था मानो हम सब एक ही परिवार के सदस्‍य है फिर चाय नाश्‍ता करके उपर गये वहां पता चला क्‍या ठंड है नागेश भाई कहता है दादा मम्‍मो सही बोली थी ठंड आदमी को चेक कर देगा, घर के चारो ओर पेड थे
ये हमारे भाई नागेश जो जम्‍मू कश्‍मीर के पत्‍थर बाज लग रहे है
जिससे और भी उपर ठंड लगने लगा हम सब नीचे आये फिर भाभी जी ने सबको खाना लगाई फिर थोडा देर बाद हम सब थक गये थे तो सब एक ही रूम मे सोने की तैयारी कर दी गई फिर सोने लगे अब नया जगह था रात मे ओढने के बाद भी ठंड लग रहा था तो अवदेश अचानक आधी रात को उठकर बैठ गया मै और पियूष भी उठ गये उसे बोले सो करके सोता ही नही था फिर उठकर वहां से सोफे मे जाकर बैठ गया पूरी रात पर हम दोनो ही बाइक चलाये थे इसलिए सो गये और सुबह जल्‍दी उठकर तैयार भी हो गये पर नागेश बोला दादा आज चर्च जाना है करके इतना ठंडा पानी मे नहाया हॅू और वो भी आधा अधूरा हम सब तैयार हो जाते है फिर लोभन भाई भी अपने पास के गांव से आ जाते है
, वो साथ मे खाने पिने का समान भी लाते है उपर छत मे बैठकर सब नाश्‍ता करके एक दूसरे के साथ बातचीत होती है फिर आज हम कार से पूरा मैनपाट घूमकर वहां से और भी जगह घूमकर कोनकुरी चर्च जाने का प्‍लानिगं संजय भाई तय किये रहते है, सबको बहुत ही प्‍यारा सा वो पल लगने लगा था क्‍योकि संजय भाई की आवो भगत को देखकर ।      


No comments:

Post a Comment