Sunday, December 30, 2018

राजनांदगांव से अंम्बिकापुर जाने की तैयारी


बाइक में राजनांदगांव से अंम्बिकापुर

दोस्‍तो,
       आज मै इस लाकडाउन के समय आप सभी से हमारे प्रिय दोस्‍ते के  साथ हमने 23 दिसंबर 2018 को बहुत ही शानदार यात्रा को आप सभी के बीच सेयर कर रहा हुं आशा है आप सभी को यहा खुशनुमा पल आप लोगो ने भी आपने दोस्‍तो के साथ भी इस प्रकार की हर वो दिन को या कहु रात को जीते होगे, ये हमारी और हमारे मित्रो के बहुत ही सुंदर सा एक अदृश्‍य यात्रा थी जिसे हम सब ने बहुत मजे लिए। हम सबने बहुत दिनो से प्‍लनिंग मे लगें हुये थे कि मैनपाट जाना है उसे छ.ग. की शिमला कहा जाता है तो क्‍यों न देखने जाया जाए  वहां पर हमारे बहुत से मित्रगण रहते है पर दो खास मित्र है जो मेरे सा‍थ राजनांदगांव मे पैथोलाजी पैरामेडीकल का कोर्स करने आये लोभन और संजय तब से ये हमारे दोस्‍त बन गये ये  दोनो साथ मेरं साथ रहे, कई बार इन लोगो ने घूमने चलने के लिए कहा पर कालेज की पढाई के वजह से कभी भी राजनांदगांव से टूर पर नही गये तो हमारे कालेज के  दोस्‍त अवदेश, पियूष और एक प्रिय मित्र नागेश जो कि साथ मे काम करते है सीसी टीवी टेक्निशयन है और भी दोस्‍तो से पूछा गया पर बाइक से जाने मे हिम्‍मत नही जुटा पाये  इसलिए हम चारो ने निकलने की पुरी तैयारी कर ली जैसे कि गमै कपडें, जैकेट, चश्‍मे, हेलमेट, बाइक की सर्विसिंग इत्‍यादि। अवदेश को अच्‍छे समाझाना पडता है कि भाई घर वालो को बता देना और उनके घर वाले उसके जाने से राजी हो जाते है, जाने से पहले अवदेश बडी बडी बाते कहने लगता है कि ठीक है पुरा बाइक के पिछे गरम कपडे बाध कर लाउगा, फिर वो भी घर चला जाता है, पियुष भी अपने घर वालो केा मंतर दे कर परमिशन ले लेता कि हम लोग ट्रेन से जा रहे है करके, इधर नागेश भाई भोढिया से रात मे ही मेरे रूम मे आ जाते है, उसी समय मै अपने मम्‍मो से बात करते हुये बताता हू उनको तो वो कहती है क्‍यो जा रहे हो वहां तो बहुत ठंण्‍डा रहती है अभी ठंडा मे क्‍या करेगे उनके ऐसा बोलने पर मेने कहा कि वहां हम लोग ठंडा चेक करने जा रहे है तो वो कहती है कि ''ठंडा ला तूमन चेक करहू कि ठंडा तूमही मन ला चेक कर दिही''  इतना ही सुनते नागेश का हवा होने लग गया क्‍योकि उसे ठंड से बहुत ही डर लगता है बोलता है दादा वहां कितना ठंड होगा, वो रात मे रूम मे भी मुह, नाक, कान को अपने गमछे से बाधे ही सेाता है, सुबह उठने पर वो बिना नहाय ही चलो मै तेयार हूं बोलता है ।   

Saturday, December 29, 2018

राजनांदगांव से रवानगी


अब हमारी यात्रा 
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                  शुरू होती है सुबह 5.45 की टाइम रहती है, नागेश और मै पियुष के घर जाते है उसको लेकर निकल जाते है  फिर भी हमारे अवदेश हमेशा कि तरह लेट कर ही देता है और हम सब बैग लेकर सुबह दिल्‍ली दरवाजे के पास सभी आपस मे मिलते है हम सभी का बैग पुरा भरा होता है पर अवदेश पुर खाली ही आ जाता है अब पुछने पर बोलता है नही पुरा समान है बस ओढने का बस घर पर ही छूट गया है, फिर हम सब निकलते है मनसुख लाल पेट्रोल पंप मे पेट्रोल डलवाकर एन एच 53 में यात्रा से पहले एक सेल्‍फी लेते है, सबकी चेहरा एक बाइकर्स की तरह हेलमेट, जैकेट, हेन्‍ड गल्‍फस, जूते के साथ अपटूडेट होकर बाइक से निकलते है, सुबह सुबह ठंड बहुत होने के कारण पुरा हाथ जाम होने लाग गया था, फिर क्‍या करते हमारी अदृश्‍य मंजिल बहुत दूर थी जब हम सब भिलाई शहर मे पहुचे तब कही जाकर सूरज कि किरणे हमारे शरीर को गर्म पडी क्‍योकी उस दिन ठंड बहुत थी। और अब जो नही हुआ था वो हो रहा था रास्‍ते मे हमारे राजनांदगांव के दो मित्र मिल गये जो कि पेपर देने रायपुर जा रहे थे, वो लोग बोले मैनपाट जा रहे हो, वो भी बाइक से नही जा पाओगे बोलने लगा पर हम लोग तो ठान लिए थे जाना ऐसे लोग हमे रोकने वाले मतलब ये टांग खीचने वाले थे चलती गाडी मे मेल मिलाप हुआ और फिर हम सब निकल लिए अपने रास्‍ते पर अब रायपुर शहर पहुचने वाले ही थे सब तरफ चहल पहल हो चुका था, दुकाने खुल चुकी थी सुबह के 10 बज चुके थे हम सब रायपुर शहर से निकर कर विधान सभा रोड के लिए सडडू के पास होटल मे हम सब ने नाश्‍ता किया अवदेश एक ऐसा आदमी है जो डबल से ज्‍यादा खाने वाला वो दो ढाई प्‍लेट नाश्‍ता कर लिया फिर बोलता है चलो हम सब मे रास्‍ता तो कोई भी नही देखा था तो गुगल मैप की सहायता से आगे बलौदाबजार वाले रोड लेकर निकल पडे।   

Friday, December 28, 2018

शिवरीनरायण से हमारी टूर प्रांरम्‍भ

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महानदी

                                 
शिवरीनरायण
जाते हुये हमे रास्‍ते मे फुल मजा करते हुये आराम से रूकते रूकाते हुए निकलते है  हम
सबने शिवनाथ नदी पार कर शिवरीनरायण 12 बजे पहुचें वहां पर हम लोग राम मंदिर मे भगवान राम जी के दर्शन के लिए गये पर उस समय राम जी भोजन कर र‍हे थे जिससे उन‍की दर्शन नही हो पाया, वहां की मंदीरे बहुत प्रचीन थी लाल रंग के ईटे से रंगे हुये थे और हमारे पास समय भी बहुत कम था इसलिए हम लोग वहां पर निकल गये कुछ देर बैठकर अब समय भी बहुत हो गया था लगभग 1 बजे चुके थे हम लोग रास्‍ता पूछते हुये निकल पडे जब हम लोग यहां से निकले इस रोड मे तो खाने का कोई होटल न मिल पाने के कारण हम लोग बाइक चलाते गये तो अब क्‍या भूख के मारे सबका हालत खराब हो चूका था तो उस टाइम अचनाक याद आया कि अवदेश के मम्‍मी ने रोटी पैक की है फिर क्‍या एक रोड मे बोरिग था वहां पर रूके जगह पर बहुत छांव व शांति थी फिर सबके सब वहां खाने के लिए टुट पडे अंटी जी ने बहुत ही
अच्‍छा टमाटर की चटनी व पुडी बनाई थी जिसे सब खाये तो ऐसा लगा कि सही मे ये आज तो सब भूख के मारे पता नही आ जा पाते कि नही, हम लोग एंजाय के रूप मे अवदेश भाई को बहुत छिलटई करते हुये  अब वो जगह छोडकर आगे कि ओर निकल चले उधर रास्‍ता बहूत ही खराब है दोस्‍तो जिससे हम सब काफि दूरी तय करने के बाद हम लोग विशाल पहाड को देखे जिससे लग रहा था कि हम लोग रायगढ के सिंगनघड रामगढ की पहाडी पर पहुंच गये पर वह खरसिया था वहां पहुंचते ही बहुत सारा धूल व ट्रके कि लम्‍बी लाइने लगी हूई थी ए‍क आदमी से रास्‍ता पुछने पर उसने बाईपास रास्‍ता बताया पर वो पुरा ट्रके चलने के रास्‍ते भर धूल के गड्डे भर गये थे जिससे निेकल गये और शहर का नामो निशन नही था और हमारी मंजिले अब भी हमसे दूर थी अब यहां से जंगले प्रारंम्‍भ होने लगी, हम लोग बाइक बहूत ही तेज गति से चला रहे थे क्‍योकि 4 बज चुके थे, शाम होने का समय हो गया था उस रोड पर ट्रके भारी मात्रा मे चल रही थी अब उसके बाद हम लोग रूकते हुये रास्‍ता पुछते हुये छाल, हाटी,  धरमजयगढ वाले रोड पर निकल पडे धरमजयगढ वाले रोड ऐसा लग रहा था मानो हम सब प्रकृति के गोद मे आनंद महसूस कर रहे थे, हाटी के पास बडी बडी घटी मिली जो बहुत ही रोमांचक अनुभव था, आसपास से पेडों से वो ठंडी हवाये चलने लगी, महुएं की खुशबू और वो मनोरम दृश्‍य  जिसमे वहां की संस्‍कृति झलक रही थी वहां के जनजाति जंगलो वाले रास्‍ते से बाजार करके आने जाने वाले लोग दिखाई दे रहे थे, वो पुरानी जीप जिसमे जनजातियों के पुरा भरकर वापस घर ले जा रहे थे जिसे आज भी हम सब कभी भूल नही पायेगे। यहां से ऐसा प्रतित हो रहा था मानो अब शहरो के नामो निशान मिट गया हो पर मैने पेपरो मे दोस्‍तेा से काफि सुना था धरमजयगढ अच्‍छा फेमस शहर होगा पर ऐसा नही है, पर वहां के रहने वाले जनजतियो के लिए शहर से कम नही है इस रास्‍ते पर हमे पेट्रोल पंप मिला न ही एटीएम होगा भी तो एकत ही होगा अब यहां से निकलते हुऐ हमे अंधेला होने लग गया था हमारे दोस्‍त लोग हिम्‍मत खो बैठे थे पर क्‍या करते हौसला बढाने के गाडी रोककर एक दूसरे से बाते साते करके बस अब ज्‍यादा दूर नही हमारी मंजिल करके एक दूसरे को चार्च किये फिर निकल पडे रास्‍ते खराब तो थे ही अब हौसला ही था हमारे पास वहां से 30-35 किमी के बाद हम लोग को शहरो की तरह लाइटे जलती हुई दिखाई पडी वो शहर है पत्‍थलगांव था दोस्‍तो जहां पर रौनक ही रौनक वहां पर सभी प्रकार की दुकाने, सोरूम, पब्लिक सेवाएं आदि उपल्‍ब्‍ध है वो ही एक मात्र हमे शहरो की तरह दिखाई दिया जहां पर ट्रेफिक पुलिस भी तैनात थे अब ऐसा लग रहा था जैसे हम लोग सही जगह पर पहुचे है वहां से अपने दोस्‍त संजय को काल करके बता दिया उसने कहा चलो आ गये हो अब ज्‍यादा दूर नही है, पर रात करीब 7.30 हो चुका था बहां से सीतापुर के लिए रास्‍ता पुछते हुए हम लोग अंधेरे मे ही अपनी करीब मंजिल के पास पहॅुचने लगे
                           वहां पहुचते ही संजय भाई हम सब को लेने आ ही रहे थे मिलकर सबको बहुत अच्‍छा लगा, पूरी दुकाने सजी हुई थी क्रिसमस की तैयारी मे,  वहां से उसने अपने घर ले गया वहां उनके घर जाने पर हम लोग के आने की खूशी मे सब खाने की तैयारी मे लगे हुये थे अब हम सबको ए‍हसास होने लगा कि ठंड है यहां पर वहां तो सब सेवटर पहने हुऐ थे, फिर हम
ठंड का एहसास 
सबके लिए गर्म पानी लाया गया पिने के लिए जिसे देख कर ऐसा लगा क्‍या गर्म पानी पियेगे पर पिने के बाद पूरा शरीर गर्म हो गया वहां पर मौसम बहुत ही ठंड थी
,  जिससे सभी गर्म पानी से ही  हाथ धोकर फ्रेस होकर बैठे फिर भाभी जी आई सब से मेल मिलाप हुआ सब अपने अपने नाम बाताऐ।संजय भाई का बचपन मिशन से ही उनकी पढाई हुई है इसलिए वो भी अपने परिवार के दो भतिजीयों को भी अपने साथ घर पर रख कर पढा रहे थे उन दोनो से मिलकर अच्‍छा लगा अब ऐसा लग रहा था मानो हम सब एक ही परिवार के सदस्‍य है फिर चाय नाश्‍ता करके उपर गये वहां पता चला क्‍या ठंड है नागेश भाई कहता है दादा मम्‍मो सही बोली थी ठंड आदमी को चेक कर देगा, घर के चारो ओर पेड थे
ये हमारे भाई नागेश जो जम्‍मू कश्‍मीर के पत्‍थर बाज लग रहे है
जिससे और भी उपर ठंड लगने लगा हम सब नीचे आये फिर भाभी जी ने सबको खाना लगाई फिर थोडा देर बाद हम सब थक गये थे तो सब एक ही रूम मे सोने की तैयारी कर दी गई फिर सोने लगे अब नया जगह था रात मे ओढने के बाद भी ठंड लग रहा था तो अवदेश अचानक आधी रात को उठकर बैठ गया मै और पियूष भी उठ गये उसे बोले सो करके सोता ही नही था फिर उठकर वहां से सोफे मे जाकर बैठ गया पूरी रात पर हम दोनो ही बाइक चलाये थे इसलिए सो गये और सुबह जल्‍दी उठकर तैयार भी हो गये पर नागेश बोला दादा आज चर्च जाना है करके इतना ठंडा पानी मे नहाया हॅू और वो भी आधा अधूरा हम सब तैयार हो जाते है फिर लोभन भाई भी अपने पास के गांव से आ जाते है
, वो साथ मे खाने पिने का समान भी लाते है उपर छत मे बैठकर सब नाश्‍ता करके एक दूसरे के साथ बातचीत होती है फिर आज हम कार से पूरा मैनपाट घूमकर वहां से और भी जगह घूमकर कोनकुरी चर्च जाने का प्‍लानिगं संजय भाई तय किये रहते है, सबको बहुत ही प्‍यारा सा वो पल लगने लगा था क्‍योकि संजय भाई की आवो भगत को देखकर ।      


Thursday, December 27, 2018

मैनपाट की सैर


मैनपाट की सैर



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 अब हम सब मैनपाट जाने के लिए तैयार हो गये थे संजय भाई ने गाडी वाले को काल करके बुला लिया था बस भाभी जी तैयार होने मे ही समय लग रहा था क्योकि वो ही तो सारी तैयारी मे लगी हुई थी अब हम सब कार मे बैठकर सीतापुर से मैनपाट की सैर मे निकल पडे सीतापुर ब्लाक से लगा हुआ है मैनपाट जो अम्बिकापुर से आने पार ये लास्ट साइट पडती है हम सब यहां से इटर होने लगे एक दो गांव के बाद ही घाटी प्रारंभ हो गयी हम सब आइड साइड का नजारा देखने लगे पूरी घाट ही घाट अब हम सब जमीन से पूरी उपर आ गये थे वहां से पुरा जमीन नीचे लगने लगा था और हम असमान के करीब आ गये थे वो दृश्य हमे आज भी याद दिलाता है, वहां रास्ते मे एक कार ढालान मे उतर गयी थी अब हम आगे बढे हमारी गाडी जाते ही सीधे उल्टा पानी मे जाता है और डावर गाडी को रिवर्स लेकर छोड देता है हमरी कार उपर रिवर्स मे ही चड जाती है सब के सब हसने लगते है अरे ये क्या हमारी गाडी को कोई खीच रहा है लगने लगा नीचे उतर कर पानी को देखे की क्या सही मे यहां पानी उल्टा चढता है देख कर सबको बहुत मजा आया वहां पर कुछ लोग विडियो भी बना रहे थे वो एक दूसरे से पूछ रहा था कि कैसे ये सही है की पानी उल्टा चढ रहा है, वहां पर हमारे लोभन भाई के कुछ दोस्त भी मिल गये




अब वहां से निकलकर हम लोग लोभन भाई के हॉस्पिटल मे गये उनका जाब यही है वहां उसने साइन कर सब अपने स्टाफ के लोगो से मिलकर वहां से निकल लिए अब हम लोग आगे गये तो हमारी कार की हवा कम होने से हवा भर कर रास्ते मे पताल तोड कुआं देखे फिर हम लोग बौद्व मंदिर गये वहां पर  जाने से ऐसा लग रहा था कि हम लोग तिब्बत मे आ गये है। 




वो जान अब्रहाम की मुवी की याद आ गयी वहां पर रहने वालो लोगे के घरो मे जो झण्डा था बिल्कुल वैसा ही था जिसे हमने फिल्मो मे देखी है । 





अब हम सब मंदिर वाले रास्ते से आ ही रहे थे कि हमारी कार की हवा फिर कम होने लगी अब क्या करते पास मे गैरेज पता करके वहां जाने से वो भी बहुत टाइम लगा दिया उसे टीक करने मे हम लोग वहां के पास के रेस्ट हाउस मे घूमने चले गये वहां देखे कि रहने वाले के लिए कैसे सेवा उपल्ब्ध है वो बहुत ही बडा रिसार्ट है वहां रूकने के लिए पर्शनल रूम है खाने का जो आर्डर देने पर वो आपके लिए तैयार करके आपके रूम मे लाने की सुविधा है अब हम सब पानी पी कर वहां से कार बन गयी थी सबको भूख भी लगने लगा अब हम सब मैनपाट की एडवेचर का मजा ले रहे थे हम लो वहां से दलदली गये ।





वहां बहुत भीड लगी हुई थी, कुछ लोग गधे की सवारी करते नजर आये दोस्तो घोडा बोलकर खच्चर पर सवारी करा रहे थे वहां घूमने के भी फीस चार्ज लिया गया, वहां पर हम लोग भी दलदली जो कि जंप करने से  स्पंज की तरह लगता है वहां पर  बहुत एन्जाव करते हुए हम लोग वहां से निकलकर






 


आगे बहुत ही खुबसूरत सा नजारा देखने को मिला फिस पांइट पर वहां उंची उंची झरने थी जहां पर पानी बहुत मा़त्रा मे थी वहां पर बैठकर हम सबने जो घर से बनाकर लाये थे उसे सब झरने के पास मे ही बैठकर खाया वहां पर भी लोगो का बहुत भीड था अब हम सब लोग वहां से निकल गये वहां बहुत एंजाय किये, अब इसके बाद हम टाउ की खेती की ओर गये वहो पर का नजारा अति मनमोह देने वाला था अब हम लोग टिनठिनी पत्थर होते हुये टाइगर पांइट पर गये वहां भी दोस्तो कचरे के समान भीड थी कारे की लम्बी कतारे थी हम लोकल लोग के साथ थे तो हमे कोई परेशानियां नही हुई वहां से नजारा पूरा जंगल ही जंगल लगता थावहां पर स्टंट करने के लिए इस पार से उस पार जाने वाले खाई के उपर ही उपर तार की रस्सी से जाने के लिए भी है जिसे लोग एंजाय कर रहे थे वो पोटो आपलोगो के सेयर कर रहा हॅु ।
                        अब शाम भी होने जा रही थी तब फिर संजय भाई ने हम सब को कैलाश गुफा व गुरूकुल घुमाने की चाह रख रहे थे पर शाम हो चुकी थी हम सब फिर भी कैलाश गुफा गये पर सोमवार का दिन था इसलिए वो बंद मिला कुछ भी वहां हमारे ही जैसे घूमने गये थे वहां, पर रात हो गयी थी हम लोगो ने मोबाइल के लाइट से उस जगह को घूमा पैरो से चला नही जा पा रहा था फिर हम सब वहां से निकलकर बगीचा से होते हुये निकले वहां पर गाडी वाले सोनू भैया ने बताया की यहां पर रैनी कुजूर का गांव है जो एक आदिवासी माडल है जो दिल्ली मे रहकर मॉडलिंग करती है हमने इसके बारे मे पहले भी जानते थे तब मै अपने दोस्तो को बताया इसके बारे मे कि ये वर्ड की टाप मॉडल रिहाना का सेम कापी है इसलिए इसने अपना नाम बदलकर रिहाना रख लिया है इसे हिस्टी चैनल मे भी इसका इंटरव्यू आ चुका है ये सब बाते चलती रही हम सब बहुत ही एन्जाय कर रहे थे पर अवदेश भाई का हालत खराब हो चूका था बार बार उल्टी कर के वो ज्यादा मजा नही ले पाया उसका कहना था कि ये गाडी डीजल वाली है मै पहली बार देखा कि डीजल वाली गाडी से भी लोगो को उल्टी हो जाता है रात मे गाडी बहुत तेज चल रही थी और हम सब एक ढाबे मे गये सोनू भैया बोलता है इससे बेस्ट ढाबा और कही नही मिलेगा तब हम लोग वहां खाये पर वहां वो सुविधा नही थी जो हमारे राजनांदगांव रायपुर मे होती है तब सोनू भैया बोलता है इधर उतना विकास नही हुआ है यहां वाले लोग के लिए रायपुर दुर्ग दिल्ली बाम्मे जैसा है फिर क्या करते हम सब वहां थोडा बहुत खाये फिर कुनकुरी चर्च के लिए निकल पडे करीब रात के 9 बज चुके थे।

Wednesday, December 26, 2018

कुनकुरी चर्च


कुनकुरी चर्च
                         
  

अब हम सभी कुनकुरी चर्च पहुच चुके थे वहां भी गेट से बहुत सारी कारे खडी थी हमे लग रहा था यह चर्च एशिया का दूसरे सबसे बडे चर्च है तो अच्छा बडा सा होगा ऐसा लगा दोस्तो पर ऐसा नही है वो अब वहां पहुचने के लिए एक गली से जाना पडता है जहां सिर्फ एक ही कार अंदर जा सकती है हम लोग को लगा यहां तो पहले से इतनी कारे खडी है तो पता नही हम लोग कैसे अंदर जा पायेगे और वो हम सब कार पार्किग करके सब अंदर पैदल गये रात हो गया था इसलिए हम सबको कुछ समझ नही आ रहा था पर अंदर जाने पर देखे कि बहुत लोग चर्च के बहार ही बैठे थे और हम सब अंदर गये वहां भी बहुत सारे लोग एक ही हाल मे सभी प्रे कर रहे थे वहां जाने से हमे ऐसा लग रहा था कि हम लोग रोम के फादरों के साथ प्रे कर रहे है फिर वहां हम सभी ने बैठा जगह खाली देखकर अब हमे वहां भाषा समझ नही आ रहा था क्योकि वे लोग वहां अपने सदरी बोली मे ही प्रे कर रहे थे वहां पर बजने वाले वाद्ययंत्र बहुत ही पुराने थे उसे सुनकर बहुत ही अच्छा लगरहा था क्योकि वो धुन जो थी बिना साउंड मिक्सींग की थी वो बहुत ही प्यारा था वहां पर दूर दराज से भी लोग आये हुये थे हमारे दोस्तो के लिए पहला यह पल था जब वो चर्च मे कदम रखे थे तो उनके पास बहुत सारी सवाले थी जो मुझसे वो पूछने लगे वो सब मै बताता रहा अब ऐसे तैसे हम सब वहां दिनभर कार मे घुमने के वजह से बैठने मे तकलीफ होने लगी तो हम लोग बहार निकल कर पूरा चर्च के चारो घूमना शुरू कर दिया 








फिर घूमते हुए हम सब वहां पर बने हुये प्रभु ईसु मसीह की झांकी को घूमे वहां हम लोग को ही देखने से ऐसा लग रहा था कि मानो हम ही लोग इस बडे त्यौहार को सेलिब्रेट कर रहे हो, वहां पर कुछ फारेनर भी आये हुये थे जब 12 बजा तो लगा की पटाखे फूटेगे पर ऐसा कुछ नही हुआ क्योकि ज्यादातर लोग प्रेयर कर रहे थे वहां से ही फादर ने सबको बधाईयां दी कुछ लोग बहार मे बैठकर सुन रहे थे फिर प्रभु की प्रसाद की बारी आयी तो हमारे दोस्तो ने कहने लगे कि यहां तो प्रसाद मे वाइन बट रहा है क्यो न हम भी थोडा ग्रहण कर ले पर फादर के अनुसार वो सिर्फ उनके लिए था जो बत्तिसवां ले चुके है हुम लोग देखते रह गये हमारे दोस्त नागेश का मन नही मान रहा था इसलिए उसने पास से जाकर उसे ग्रहण कैसे करते है, फादार क्या करता है मतलब जो अर्शिवाद देते है वो सब इनके लिए नया था इसलिए वो ग्रहण करने से पहले पूरा अभ्यास मे लग गया पर बोलता है, अगर हम लोग जायेगे तो पकडा जायेगे दादा मै हंसने लगा अरे छोडो यार ये सब हमारे लिए नही है चलो और घूमते है बोलकर हम लोग चर्च के सातो दरवाजो के भी देखे कि हां ये सही मे बहुत बडा है वो सब हम लोग एंजाय करते रहे, फिर भाभी जी और वो साथ मे दोनो लडकीयां आये हम सब एक दूसरे को बधाईयां देने लगे फिर भी अब चर्च का प्रेयर समाप्ति  की ओर था कुछ लोग भी चर्च से जाने लगे तो हम लोगो ने वहां से निकले एक शाप खुली थी जहां केक बिक रहे थे तो हम लोग भी एक केक खरीद लिए!
                                  अब सोनू भैया का अतापता नही  था कि वो कार कहां पार्किगं करके सो रहे है काल करने पर वो भी नही उठा रहे थे तो हम लोगो ने एक एक कार को चेक कर उसे ठूंठ निकाला फिर कार के पास सभी ने केक काटा और संजय भाई के साथ हम सबने ्िरकसमस सेलिब्रेट करते हुये सब कार मे बैठकर वापस आये वो लोभन भाई का कहना था कि मुझे मेरे घर छोड दो कल सुबह तुम लोग बाइक से आना फिर हम सब उनके गांव को देखेगे फिर हम लोग वहां से निकलकर रातो रात संजय भाई के घर आ गये और सब सीधे सोने लग गये!

Tuesday, December 25, 2018

संजस भाई से अलविदा


संजय भाई के घर से अलविदा
                           अगले दिन सुबह हम सब लोग सो कर उठे फिर नहाने धोने के लिए तो अंम्बिकापुर को स्वच्छता मे पहला पुरष्कार मिला हुआ है वो सब के कारण वहां के बस स्टैड पर भी फ्रि मे साफसुथरे सुलभ का व्यवस्था था जो सच मे तारिफे काबील है जहां पर सभी जगह उत्तम व्यवस्था थी वहां पर मजाक मजाक मे थोडा अवदेश भाई के साथ थोडा उच नीच हो गया पर महौल को संभाल लिया गया फिर संजय के घर जाकर नास्ता व खाना खा कर हम लोग उन सभी से अलविदा लेकर लोभन भाई के घर की ओर प्रस्थान कर लिए  
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हमारी यादें मैनपाट की 

कुछ तश्‍वीरें