Thursday, December 27, 2018

मैनपाट की सैर


मैनपाट की सैर



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 अब हम सब मैनपाट जाने के लिए तैयार हो गये थे संजय भाई ने गाडी वाले को काल करके बुला लिया था बस भाभी जी तैयार होने मे ही समय लग रहा था क्योकि वो ही तो सारी तैयारी मे लगी हुई थी अब हम सब कार मे बैठकर सीतापुर से मैनपाट की सैर मे निकल पडे सीतापुर ब्लाक से लगा हुआ है मैनपाट जो अम्बिकापुर से आने पार ये लास्ट साइट पडती है हम सब यहां से इटर होने लगे एक दो गांव के बाद ही घाटी प्रारंभ हो गयी हम सब आइड साइड का नजारा देखने लगे पूरी घाट ही घाट अब हम सब जमीन से पूरी उपर आ गये थे वहां से पुरा जमीन नीचे लगने लगा था और हम असमान के करीब आ गये थे वो दृश्य हमे आज भी याद दिलाता है, वहां रास्ते मे एक कार ढालान मे उतर गयी थी अब हम आगे बढे हमारी गाडी जाते ही सीधे उल्टा पानी मे जाता है और डावर गाडी को रिवर्स लेकर छोड देता है हमरी कार उपर रिवर्स मे ही चड जाती है सब के सब हसने लगते है अरे ये क्या हमारी गाडी को कोई खीच रहा है लगने लगा नीचे उतर कर पानी को देखे की क्या सही मे यहां पानी उल्टा चढता है देख कर सबको बहुत मजा आया वहां पर कुछ लोग विडियो भी बना रहे थे वो एक दूसरे से पूछ रहा था कि कैसे ये सही है की पानी उल्टा चढ रहा है, वहां पर हमारे लोभन भाई के कुछ दोस्त भी मिल गये




अब वहां से निकलकर हम लोग लोभन भाई के हॉस्पिटल मे गये उनका जाब यही है वहां उसने साइन कर सब अपने स्टाफ के लोगो से मिलकर वहां से निकल लिए अब हम लोग आगे गये तो हमारी कार की हवा कम होने से हवा भर कर रास्ते मे पताल तोड कुआं देखे फिर हम लोग बौद्व मंदिर गये वहां पर  जाने से ऐसा लग रहा था कि हम लोग तिब्बत मे आ गये है। 




वो जान अब्रहाम की मुवी की याद आ गयी वहां पर रहने वालो लोगे के घरो मे जो झण्डा था बिल्कुल वैसा ही था जिसे हमने फिल्मो मे देखी है । 





अब हम सब मंदिर वाले रास्ते से आ ही रहे थे कि हमारी कार की हवा फिर कम होने लगी अब क्या करते पास मे गैरेज पता करके वहां जाने से वो भी बहुत टाइम लगा दिया उसे टीक करने मे हम लोग वहां के पास के रेस्ट हाउस मे घूमने चले गये वहां देखे कि रहने वाले के लिए कैसे सेवा उपल्ब्ध है वो बहुत ही बडा रिसार्ट है वहां रूकने के लिए पर्शनल रूम है खाने का जो आर्डर देने पर वो आपके लिए तैयार करके आपके रूम मे लाने की सुविधा है अब हम सब पानी पी कर वहां से कार बन गयी थी सबको भूख भी लगने लगा अब हम सब मैनपाट की एडवेचर का मजा ले रहे थे हम लो वहां से दलदली गये ।





वहां बहुत भीड लगी हुई थी, कुछ लोग गधे की सवारी करते नजर आये दोस्तो घोडा बोलकर खच्चर पर सवारी करा रहे थे वहां घूमने के भी फीस चार्ज लिया गया, वहां पर हम लोग भी दलदली जो कि जंप करने से  स्पंज की तरह लगता है वहां पर  बहुत एन्जाव करते हुए हम लोग वहां से निकलकर






 


आगे बहुत ही खुबसूरत सा नजारा देखने को मिला फिस पांइट पर वहां उंची उंची झरने थी जहां पर पानी बहुत मा़त्रा मे थी वहां पर बैठकर हम सबने जो घर से बनाकर लाये थे उसे सब झरने के पास मे ही बैठकर खाया वहां पर भी लोगो का बहुत भीड था अब हम सब लोग वहां से निकल गये वहां बहुत एंजाय किये, अब इसके बाद हम टाउ की खेती की ओर गये वहो पर का नजारा अति मनमोह देने वाला था अब हम लोग टिनठिनी पत्थर होते हुये टाइगर पांइट पर गये वहां भी दोस्तो कचरे के समान भीड थी कारे की लम्बी कतारे थी हम लोकल लोग के साथ थे तो हमे कोई परेशानियां नही हुई वहां से नजारा पूरा जंगल ही जंगल लगता थावहां पर स्टंट करने के लिए इस पार से उस पार जाने वाले खाई के उपर ही उपर तार की रस्सी से जाने के लिए भी है जिसे लोग एंजाय कर रहे थे वो पोटो आपलोगो के सेयर कर रहा हॅु ।
                        अब शाम भी होने जा रही थी तब फिर संजय भाई ने हम सब को कैलाश गुफा व गुरूकुल घुमाने की चाह रख रहे थे पर शाम हो चुकी थी हम सब फिर भी कैलाश गुफा गये पर सोमवार का दिन था इसलिए वो बंद मिला कुछ भी वहां हमारे ही जैसे घूमने गये थे वहां, पर रात हो गयी थी हम लोगो ने मोबाइल के लाइट से उस जगह को घूमा पैरो से चला नही जा पा रहा था फिर हम सब वहां से निकलकर बगीचा से होते हुये निकले वहां पर गाडी वाले सोनू भैया ने बताया की यहां पर रैनी कुजूर का गांव है जो एक आदिवासी माडल है जो दिल्ली मे रहकर मॉडलिंग करती है हमने इसके बारे मे पहले भी जानते थे तब मै अपने दोस्तो को बताया इसके बारे मे कि ये वर्ड की टाप मॉडल रिहाना का सेम कापी है इसलिए इसने अपना नाम बदलकर रिहाना रख लिया है इसे हिस्टी चैनल मे भी इसका इंटरव्यू आ चुका है ये सब बाते चलती रही हम सब बहुत ही एन्जाय कर रहे थे पर अवदेश भाई का हालत खराब हो चूका था बार बार उल्टी कर के वो ज्यादा मजा नही ले पाया उसका कहना था कि ये गाडी डीजल वाली है मै पहली बार देखा कि डीजल वाली गाडी से भी लोगो को उल्टी हो जाता है रात मे गाडी बहुत तेज चल रही थी और हम सब एक ढाबे मे गये सोनू भैया बोलता है इससे बेस्ट ढाबा और कही नही मिलेगा तब हम लोग वहां खाये पर वहां वो सुविधा नही थी जो हमारे राजनांदगांव रायपुर मे होती है तब सोनू भैया बोलता है इधर उतना विकास नही हुआ है यहां वाले लोग के लिए रायपुर दुर्ग दिल्ली बाम्मे जैसा है फिर क्या करते हम सब वहां थोडा बहुत खाये फिर कुनकुरी चर्च के लिए निकल पडे करीब रात के 9 बज चुके थे।

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